RIP का यथार्थ

 कोरोना के इस विकराल समय पर बहुतों ने अपने आत्मीय जनों को खोया है। सामाजिक व धार्मिक कार्यकर्ता , वैदिक विद्वान, यशस्वी लेखक ,संस्कृति - सभ्यता व धर्म-कर्म के प्रचारक आदि अनेक महान व्यक्तित्व को हम सब ने खोया है । इस समय पर हम सब ने सोशल मीडिया में जैसे - फेसबुक ,व्हाट्सएप आदि साधन के माध्यम से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित किया परंतु कुछ लोगों को ' RIP ' लिखा मैंने देखा ,जिसका अर्थ व तात्पर्य मैंने समझने का प्रयास किया । जो आप लोगों के सामने प्रस्तुत है ।।


 तो आइए  'RIP' का यथार्थ को समझें :- 


हम सोशल मीडिया पर अधिकांश देखते हैं कि किसी व्यक्ति की मृत्यु की खबर को लोग RIP लिखकर भेजने लगते हैं, बिना इसके सही अर्थ को जाने, बिना सही भाव को समझे कुछ लोग भेड़ चाल चल रहे हैं। 


                जैसे-  विदेशियों  के दुष्प्रचार तथा उनके नकल करके व देश में पाश्चात्य  व्यवस्था होने से  हमारे युवाओं को धर्म की मूल अवधारणाएँ से विकृत किया जा रहा है।


RIP शब्द का अर्थ होता है Rest in Peace अर्थात् - शान्ति से आराम करो।  यह शब्द उनके लिए उपयोग किया जाता है जिन्हें कब्र में दफनाया गया हो क्योंकि ईसाई व मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार जब कभी  "क़यामत का दिन" आएगा उस दिन कब्र में पड़े सभी मुर्दे पुनर्जीवित हो जाएँगे। अतः उनके लिए कहा गया है, कि उस क़यामत के दिन के इंतज़ार में "शान्ति से आराम करो"


    लेकिन सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है । 

" नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः । 

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः " 

भावार्थ : - इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, इसको आग नहीं जला सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकता ।

                                 इसलिये हिन्दू शरीर को जला दिया जाता है, अतः उसके Rest in Peace का सवाल ही नहीं उठता। हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य की मृत्यु होते ही आत्मा निकलकर कर्मानुसार किसी अन्य नए शरीर में प्रवेश कर जाती है । 

शास्त्रों में भी कहा गया है - 

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि । 

तथा शरीराणि विहाय जीर्णा- न्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥

भावार्थ :- जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता है  ॥

उस आत्मा को अगली यात्रा हेतु गति प्रदान करने के लिए ही श्राद्धकर्म की परंपरा निर्वहन एवं शान्तियज्ञ आयोजित किए जाते हैं। 


अतः किसी हिन्दू मृतात्मा हेतु " विनम्र श्रद्धांजलि " " अश्रुपूरित श्रद्धांजलि ""आत्मा को सदगति प्रदान करें एवं परिवार को सहन शक्ति प्रदान करें"जैसे वाक्य विन्यास लिखे जाने चाहिए।  

     

    

                 अतः आइए हम सभी प्रयास करें  भविष्य में यह गलती हमसे न हो एवं हम लोग *"दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि"* प्रदान करें ना कि उसे "RIP"कहें।

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