ऋषि दयानंद की निराली बातें
*ओ३म्*
*🌹🔥गुरुवर ऋषि दयानन्द की निराली बाते ।🔥🌹*
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*१)- एक व्यक्ति ने पूछा महाराज क्या कारण है धर्मोपदेश सुनते समय नींद आ जाती है ,परन्तु नाच गाने मे व्यक्ति सारी रात जागता है ? स्वामी जी ने उत्तर दिया धर्मोपदेश तो मन को शान्ति देने तथा शरीर को स्वास्थ्यलाभ देने वाली फूलों की सेज है इसलिए नींद आती है। जब कि नाच गाना वासना को उत्तेजित करने वाले कांटे है वहाँ नींद कहाँ से आयेगी।*
*२)- फर्रुखाबाद मे पादरी जे जे लूकस ने स्वामी जी से कहा यदि आपको तोप के मुँह पर रखकर कहा जाय कि मूर्ति पूजा का समर्थन करो अन्यथा तोप से उड़ा दिये जाओगे तो आप क्या कहेंगे स्वामी जी ने उत्तर दिया भले ही उड़ा दो। मैं जीवन रहते मूर्ति पूजा का समर्थन नहीं करुंगा।*
*३)बम्बई के आर्य समाजी हरिश्चन्द्र चिन्ता मणि ने आग्रह करके स्वामी जी को फोटो के लिए तो राजी कर लिया किन्तु साथ ही आदेश दिया आर्य समाज मे मेरा फोटो न लगाया जाय वैसे तो आज समाजों में ऋषि के फोटो मिलते है लेकिन बम्बई की पहली काकड़वाडी आर्य समाज मे आज भी ऋषि का फोटो नहीं है।*
*४)- एक महात्मा ने स्वामी जी से कहा कि यदि आप संसार के उपकार का व्रत लेकर लोकहित मे न लगते तो इसी जन्म में आपको मोक्षप्राप्ति हो जाती। महाराज ने कहा मुझे अपनी मुक्ति की चिन्ता नहीं , मैं दीन दुखी और दरिद्र लोगों का कष्ट दूर करने आया हूं।*
*५)-पुराणों में गणेश की कथा को झूठा कहते हुऐ स्वामी जी ने कहा पार्वती ने अपने शरीर के मैल से बालक बनाकर द्वार पाल के रुप मे खड़ा कर दिया। यहाँ शिव का गणेश से युद्ध हुआ आश्चर्य है पार्वती को इसका पता न लगा शिव ने गणेश का सिर काट दिया और पार्वती के कहने पर हाथी का सिर लगा दिया में ये सब पाखण्ड है।*
*६)आर्य समाज मुलतान की स्थापना के समय उसके केवल सात सदस्य थे किसी ने हंसी में कहा केवल सात ही सदस्य आपके साथ है स्वामी जी बोले चिन्ता न करो मौ०साहब के साथ तो शुरु में केवल उनकी पत्नी ही साथ थी।*
*७)लाहौर मे जब किसी हिन्दू ने अपने घर में स्वामी जी को नहीं ठहराया तो डाक्टर रहीम खां ने उन्हें अपने निवास पर रखा एक दिन स्वामी जी ने इस्लाम की कुछ बातों कीआलोचना की।तो एकांत मे डाक्टर साहब ने हंसते हुए कहा आज तो आपने हम पर भी कृपा कर दी स्वामी जी मुस्करा कर बोले मेरा तो स्वभाव ही है जहाँ गन्दगी व अपवित्रता देखता हूँ पहले उसकी सफाई करता हूं। डाक्टर साहब हंसने लगे।*
*८)अजमेर मे रायबहादुर श्यामसुन्दरलाल ने स्वामी जी से कहा आप मूर्ति पूजा पर इतना कड़ा आक्रमण क्यों करते हो ? क्या कोमलता से आलोचना करके आपका ध्येय पूरा नहीं होता ?*
*स्वामी जी ने कहा मृदु आक्रमण या किसी भी रुप मे इस धार्मिक बुराई से समझौता करना हानि कारक होगा। ऐसा करते -करते कुछ समय बाद आर्य समाज भी पौराणिक समाज बन जायेगा और आर्य समाज अपना तेज गौरव खो देगा।*
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