हलाल क्या है
तमिलनाडु में एक अदालती मामले में मुसलमानों ने माना कि हलाल का अर्थ तब तक पूरा नहीं होता जब तक कि कोई मुस्लिम रसोइया उसमें नहीं थूकता।
इसलिए मुसलमानों द्वारा बनाया गया खाना बिना थूक के पूरा नहीं होता। एक अदालती मामले में उन्होंने स्वीकार किया कि थूकना ही हलाल को पूरा करता है, पूरे देश में तमिलनाडु भी शामिल है।
https://twitter.com/Indumakalktchi/status/1462710787667992578
इसका केरल और तमिलनाडु के होटलों और बिरयानी विक्रेताओं पर भारी असर पड़ा है।
हिंदुओं ने हलाल होटलों और बिरयानी बेचने वालों में भी जाना बंद कर दिया है।
तमिलनाडु और केरल में कई रेस्तरां, होटल और बेकरी हलाल स्टिकर और हलाल साइनबोर्ड हटा रहे हैं।
इन प्रतिष्ठानों में हिंदू ग्राहकों की भारी गिरावट के बाद ऐसा हो रहा है।
यही कारण है कि रोटियों और अन्य खाद्य पदार्थों पर थूकने के कई वीडियो वायरल हुए हैं।
*इससे पहले कि आप हलाल प्रोसेस से बनी बिरयानी की उस अगली प्लेट को छूएं....*
*इस सच्चाई का खुलासा मुस्लिम मौलवियों ने कोर्ट में किया*
इसलिए आपसे अनुरोध है कि होटलों में किसी भी हलाल भोजन, या सड़क किनारे स्टालों पर बिरयानी खाने से पहले सोचें, जहां आप मुसलमानों के थूक / लार खाने जा रहे हैं।
*#हलाल का बहिष्कार करें*
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
1000